Tuesday 18 June 2024

News Analysed, Opinions Expressed

जुड़ते हैं कईं नाते, रोज़ यहाँ नये-नये ...

 


जुड़ते हैं कईं नाते, रोज़ यहाँ नये-नये ।

खुलते हैं दुनियादारी के खाते, रोज़ यहाँ नये-नये ।।

 

न होता है इल्म इनके खुलने का, न बंद होने का कोई अंदाज़ा ।

तय किये जाते हैं सफर अनजाने, रोज़ यहाँ नये-नये ।।

 

चढ़ते रहते हैं चेहरों पर रंग, रोज़ यहाँ नये-नये ।

लिखे जाते हैं बग़ावत के बहीखाते, रोज़ यहाँ नये-नये ।।

 

छोडे जाते हैं ऐसे असर कि सब कुछ हो जाता है बेअसर ।

दोहराये जाते हैं किस्से पुराने, सिर्फ अंदाज़ होते हैं नये-नये ।।

 

जुड़ते हैं कईं नाते, रोज़ यहाँ नये-नये ।

खुलते हैं दुनियादारी के खाते, रोज़ यहाँ नये-नये ।।

 

 

 

 

 

Disclaimer: Views expressed above are the author's own.



Thank you so much for your inspiring words Dev.

 
Dr. Soniya Sirsat |

Nice and it's reality

 
dev javir |

Blogger's Profile

 

सोनिया सिरसाट

साखळेच्या कला, विज्ञान आनी वाणिज्य सरकारी महाविद्यालयाच्या हिन्दी विभागाची मुखेली. हिन्दी-कोंकणी-इंग्लीश भाशांतलीं स्वरचीत, अणकारीत आनी संपादीत 12 पुस्तकां प्रकाशीत. ‘बारदेस’ अंकाची पालवी संपादक म्हूण 2005 ते 2009 मेरेन वावर. सध्या ‘विवेक किरणां’ हे त्रैमासीक पत्रिकेची सह-संपादक म्हूण काम पळयता. राज्यस्तरीय तशेंच राष्ट्रीय कवी सम्मेलनांनी कोंकणी आनी हिन्दी कविता सादर केल्यात. कोंकणी तशेंच मराठी सीडी खातीर गितां आनी भजनां गायल्यांत. कोंकणी आनी मराठी नाटकुलीं आनी एकांकींनीय अभिनय केला. जे एम डी पब्लिकेशनाचो 2010 वर्साचो विशिष्ट ‘हिन्दी सेवा सम्मान’ तशेंच गोवा कोंकणी अकादमीचो 2012 वर्साचो ‘युवा चैतन्य’ ह्या पुरस्कारांनी सन्मानीत.

 

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